तुम से जुदा होते लगा था :
ख़ाक हो जाएँ वे सभी आँखें
जो तकती हैं हमें
भूखे भेड़िये की तरह
समय के ताप से
चंद की उस नर्म रात में.
तुम से जुदा होते लगा था:
कर दूं बेनक़ाब उन तमाम चेहरों को
जो ओढ़ लेते हैं शराफ़त
झक्क सफ़ेद कुरते में
भूल कर आवारगियाँ
रात के नक़ाब की.
तुम से जुदा होते लगा था:
थूक दूं उन चेहरों पर
जो बहन -बेटी कह, थप-थपाते हैं
गाल और पीठ
यौन-तृष्णा मिटाते
दिन-दिनास्ती सरे-आम.
चित्र: पांच वर्षीय सुपुत्र आएश की कंप्यूटर कारीगीरी .
