गुरुवार, 4 दिसंबर 2008

आतंक के विरुद्ध जिहाद!


देश के लिए कुर्बान मुजाहिदीनों को सलाम!


पाठक चौंक रहे होंगे । मैं क्या बेवकूफाना हरकत कर रहा हूँ.सच मानिए उन आतंकवादियों से लड़ते हुए जामे-शहादत पी जानेवाले वो तमाम जांबाज़ मुल्क के सिपाही, अफसर और आम नागरिक ही मेरी नज़र में सबसे बड़े मुजाहिदीन हैं।


मुजाहिदीन अर्थात जिहद, प्रतिकार, संघर्ष करनेवाला
, ऐसा संघर्ष जो आंतंक,अन्याय,असत्य,ज़ुल्म और अत्यचार के विरुद्ध हो। ऐसे मकसद के लिए जद्दोजिहद जिसका ईमान इंसान की जान बचाना और ज़मीन पर अमनो-अमन कायम करना हो।


अबुलकलाम आजाद, भगत सिंह, अशफाक, रामप्रसाद, विद्यार्थी,नेहरू, सुभाष जैसे अनगिनत लोग हुए जिन्होंने अंग्रेजों से मुल्क को आज़ादी दिलाने के लिए जिहाद किया.और आज इतिहास उन्हें मुजाहिदे-आज़ादी कहता है।
और मुंबई में शहीद हमारे देशवासियों ने हमें विदेशियों की नापाक साजिश से मुक्त कराने के लिए जिहद किया और शहीद तो हुए लेकिन उन्हों ने ये विश्व को दिखा दिया की तिरंगा झुकनेवाला नहीं है।
समूची इंसानियत को बंदूक की नोक पर नचाने का सपना देखने वाले इस्लाम समेत किसी भी धर्म-सभ्यता में मुजाहिदीन नहीं कहे जा सकते।
वे आतंकवादी हैं, उग्रवादी हैं, दहशतगर्द हैं।
उन्होंने कठोर से कठोर सज़ा मिलनी चाहिए।
उन्हें मज़हब और धर्म का इस्तेमाल करने की इजाज़त किसी भी कीमत पर नहीं मिलनी चाहिए.इस्लाम ऐसे दहशतगर्दों के लिए कठोरतम सज़ा की हिमायत करता है.मुस्लिम परिवार मेंजन्म लेने के कारण इस्लाम की थोड़ी-बहुत जो समझ , और संस्कार ने जो तमीज दी है , उसके आधार पर मैं सबसे पहले मुसलामानों से अपील करता हूँ की आप आगे आयें और इस्लाम को बदनाम करनेवाले इन दहशतगर्दों के विरुद्ध जिहाद करें.अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए, पूरी शक्ती के साथ आतंकवादियों का मुकाबला कीजिये,आतंकवाद की कमर तोड़ दीजिये.आपके प्यारे नबी की हदीस है ; वतनपरस्ती ॥ अपने वतन की तरफ़ बुरी नज़र से देखने की कोई हिमाक़त करे तो उसकी आँख फोड़ दीजिये।

जिहाद वो नहीं जैसा नाम-निहादी कर रहे हैं बल्कि उनके ख़िलाफ़ खड़े होना जिहाद है।
इस्लाम में जिहाद

बे-ईमानी के विरुद्ध ईमानदारी के लिए संघर्ष।
असत्य के विरुद्ध सत्य के लिए संघर्ष।
अत्याचार, ज़ुल्म, खून-खराबा और अन्याय के विरुद्ध सद्भाव, प्रेम, अमन और न्याय के लिए संघर्ष।


अब कुरान क्या कहती है:
...जो तुम पर हाथ उठाए , तुम भी उसी तरह उस पर हाथ उठा सकते हो,अलबत्ता ईश्वर से डरते रहो और यह जान रखो कि ईश्वर उन्हीं लोगों के साथ ही जो उसकी सीमाओं के उलंघन से बचते हैं।
२:१९४
....उन लोगों से लड़ो,जो तुमसे ladte हैं,परन्तु ज्यादती न करो।अल्लाह ज्यादती करने वालों को पसंद नहीं करता.
२:१९०
....और यदि तुम बदला लो तो बस उतना ही ले लो जितनी तुम पर ज्यादती की गयी हो. किन्तु यदि तुम सबर से काम लो तो निश्चय ही धैर्य वालों के लिए यह अधीक अच्छा है।
१६:२६


शान्ति, सलामती इस्लाम की पहचान रही है.जभी आप एक-दूसरे से मिलने पर अस्सलाम अल्लैकुम यानी इश्वर की आप पर सलामती हो , कहते हैं.आप कुरान की ये आयत जानते ही हैं:
जिसने किसी की जान बचाई उसने मानो सभी इंसानों को जीवनदान दिया।
५:३२


मुंबई के हादसे पर इंसानियत आपसे सवाल करती है.यूँ देश के तमाम मुस्लिम sansthaaon, इमामों और उल्माओं ने घटना की कठोर निंदा के साथ दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा की मांग की है.समय-समय पर एक मुस्लिम संघठन आतंकवाद-विरोधी जलसा वर्ष-भर से जगह-जगह आयोजित करता रहा है.दूसरे प्रमुख संगठन ने अभी अपना अमन-मार्च ख़त्म किया है.लेकिन महज़ निंदा और जलसे जुलुस से अब कुछ नहीं होने वाला अब ज़रूरत खुलकर आतंकवादियों का मुकाबला करने की है.पास-पड़ोस में पनप रही ऐसी किसी भी तरह की मानसिकता को ख़त्म करने की.सरकार और पुलिस को सहयोग करने की.संसार के सामने प्रमुख चुनौतियों में से एक है आतंकवाद!जिसका समूल नाश बेहद ज़रूरी है॥ वसुधैव कुटुंब बकम .ये हमारी विरासत है।
और पगैम्बर मुहम्मद की ये हदीस हमारा ईमान :
सम्पूर्ण स्रष्टि इश्वर का परिवार है.अतःइश्वर को सबसे प्रिय वो है जो उसके परिवार के साथ अच्छा व्यव्हार करे।


23 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

आप ने जिहाद को सही समझा। जिहाद हमेशा पूरे मानव समाज के हित में ही हो सकता है।

Anil Pusadkar ने कहा…

सही कह रहे हैं आप। आपसे सहमत हूं।

Sanjeev ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
मिहिरभोज ने कहा…

शहरोज जी बहुत ठीक लिखा आपने....ये जिहाद हर देश वाशी को लङना होगा

Sanjeev ने कहा…

मैं एनडीटीवी पर नरीमन बिल्डिंग के आपरेशन में मददगार नागरिक का इन्टरव्यू देख रहा था जिसने घटनास्थल का नक्शा बनाकर सुरक्षाबलों को दिया और उसकी मदद से आतंकियों को मार डाला गया। मुझे लगता है उसने अपना फर्ज निभाया बाकी सब तो बस जुगाली ही कर रहे हैं।

कुश ने कहा…

बिल्कुल दुरुस्त फरमाया शहरोज़ भाई..

Aflatoon ने कहा…

" फिर जिस किसी ने भी कण भर नेकी की होगी , वह उसको देख लेगा। और जिसने कभ भर बुराई की होगी , वह उसको देख लेगा ।"-९९:७-८
" थल और जल से बिगाड़ पैदा हो गया है लोगों के अपने हाथों की कमाई से , ताकि (ईश्वर) मजा चखाए उनके कुछ कुकर्मों का , कदाचित वे बाज आ जाएं ।" -३०:४१
" उसने दयालुता की नीति अपने लिए अनिवार्य कर ली है।"-६:१२
" संपूर्ण सृष्टि ईश्वर का परिवार है ,अत: ईश्वर को सबसे अधिक प्रिय वह है जो उसके परिवार के साथ अच्छा व्यवहार करे ।"
"धर्म के विषय में कोई ज़ोर-जबरदस्ती नहीं है ।"-२:५६
"और (हे ईमान वालों) ये लोग अल्लाह के सिवा जिनको पुकारते हैं उन्हें गालियाँ न दो ।"-६:१०८

Alok Nandan ने कहा…

amin!!

डॉ .अनुराग ने कहा…

सही कह रहे हैं आप। आपसे सहमत हूं।

ज़ाकिर हुसैन ने कहा…

सही फरमाया आपने. आज कल छदम जिहाद ने नौजवान पीढी को गुमराह किया हुआ है. हमें इस छदम जिहाद के खिलाफ भी जिहाद छेड़ना पड़ेगा.

रंजना ने कहा…

आपकी भावनाओं को नमन ! बहुत बहुत सुंदर सार्थक बात कही आपने.
पूर्णतः सहमत हूँ आपसे और दुआ करती हूँ कि सभीलोग ऐसी ही सोच रखें.

gunjesh ने कहा…

bhaiyA, IS BAR ID KE DIN SE HI MAN MEN EK SWAL THA KI KYA MAIN MUSALMAN NAHI HUN, KYA MUSALMAN HONE KE LIYE 'KALMA' PADHNA ZARURI HAI YA FIR MANS KHANA????AISE BAHUT SE SWAL THE JO MERE MAN KO BAHUT PARESHAN KARTE.
APNE AAJ SAB KA HAL DE DIYA...
SACH HAI KI JO BHI MUKAMMAL IMAN WALA HAI WO MUSALMAN HAI AUR JO BEIMAN HAI WO KAFIR.
POST HMESHA KI TRAH HI APNE PRYASON MEN SJAG HAI.
MERA BLOG KHUL NAHI RHA THA ISLIYE NYA BLOG BNA RHA HUN URL HAI
http://www.ekharil.blogspot.com
gmail.id :- gunjeshkcc@gmail.com

tariq sabri ने कहा…

janab aapka article parh ke log ye jaan gaye ki aakhir jihad kya hota hai? warna log to aatankwdiyo ko jihadi mante hain wo jihadi nahi dahshatgard hain...........
mera bhi un shaheedo aur un patrkaro ko salam hai jo dushmano se loha lete hue shaheed hue aur jin patrkaro ne apni jaan ki baaji lagakar pura coverage humko dikhaya..........

abhivyakti ने कहा…

aap jaise rashtrawadi muslmano ki samaj ko zaroorat hai ,bahut achcha likha hai aapne.
-dr.jaya

फिरदौस, बात बोलेगी हम नहीं ने कहा…

sawal yeh nahi...ki kaun jehad kar raha hai?? or kyun kar raha hai?
very initially it is decided truth is paradoxical...

hamare tathakathit dharmik charampanthi is satya ke paradoxical hone ka fayeda utha lete hai??

bhukh garibi se trast sidhe sadhe aadmi ko path se bhatka dena koi badi bat nahi hai...or dharm is kam me sabse bara hathiyar hai...

shuru se hi dunia ke sare bure kam..dharm ki aar me hi hote hai??

or kyun na ho...?

sahi artho me isme koi burai nahi...
manushyata jis disha me jaa rahi hai?? ye ghatnayen dhire dhire kuchh ek do varshon me hi aam ghatna ban gayi hai??
ab kisi ko kisi aatanki gatividhi pe aascharya nahi hota,jaise logon ko lagta hai? yeh to hona hi tha..

aam aadmi ke man me ek gussa hai..wah aadmi pakistan ka hai ya hindustaan ka isase koi fark nahi parta nahi isase bhi nahi farak parta hai ki wah KHALISTAN ki mang karta koi sikh,HINDURASHTRA ki mang karta bajrangdalactivist hai,SWATANTRA KASHMIR ki mang karta koi mushalman ,ya fir egalitarian society ki mang karta koi naxalite....

sab ke andar kam ya jyada ek hi tarah ka chhobh hai?? wah chhobh kya kya hai?? yeh sabhi jante hai??

is roj ba roj tej se tivratar hoti jati dunia me HASHIYE PE DHAKELE JANME KA DUKH...

HAM SAB KO MILKE YEH SONCHNA HOGA AAJ PURE MANUSHYATA KO DHYAN ME RAKHTE HUE JEHAD KI BHUMIKA KYA HOGI...MANUSHYA KO BEHTAR BANNE BANANE SE BARA KOI JEHAD NAHI HAI? SARE ULEMAON DHARMIK RAJNITIK AAKAON KO , DESH OR SAMAJ KE NITI NIRDHARAKO KO SONCHNA HOGA KI abhi ke samay me jehad ki bhumika kya ho??
MARKS NE BHI JEHAD KIYA THA
VIVEKANAND NE BHI,GANDHI NE BHI
BHAGAT OR ASFAK NE BHI...IN SAB KA JEHAD MANUSHYATA KO BEHTAR BANANE KA JEHAD THA...NA KI KISI SANKRINTA KO PAROSHANE OR THOPNE KE LIYE...

ANT ME SAHROJ BHAI KO SATYA KI MASHAL JALAYE RAKHNE KE...(KYA KAHUN BHAI BHAVUK HO GAYA AAPKO YAD KAR SHABD KHATMA HO GAYE AAP SAMAJH LENA IS BHAI KI PIRA OR DUA KO..)

संत शर्मा ने कहा…

Bahut sahi kaha aapne, Nirdosho ka khoon bahana kisi bhi dristhi me, dharm me, Jehad (Fight against unjustic) nahi kaha ja sakta. Kaash aapke vichar un logo ka hirday parivartan kar sake, jinone jahshatgari ko aapna iiman bana dala hai, jo chalte to aadharm ke rashte par hai lekin darshate kuch yu hai mano Dharn inhi ke bhujbal se surakshit hai. Very good thought.

Pyaasa Sajal ने कहा…

salaam hai is lekh ko...
aaina dikha do jise soorat na pasand aaye,wo khud samajh jaaye...

is lekh ko zyaada se zyaada logo se baantne ki koshish kare...imaandari se kehta hoon ise kahin prakaashit karne ki koshish kare :)

isee jazbe ke saath...
मिर्ज़ा गालिब को उनके 212वीं जयंती पर बधायी दे:
http://pyasasajal.blogspot.com/2008/12/blog-post_27.html

COMMON MAN ने कहा…

aapse poorntaya sahmat. yahi prarthana hai ki ye sab ki samajh me aaye. ek dikkat jo mujhe mahsoos hoti hai wo yah hai ki jahan ham log parivartan ko sweekar nahi karte wahin se dwand shuru ho jaata hai.

amitabh ने कहा…

wah janab..jihad ko jesa aapne samjha aour mana he..kash esa har koi samjhe aour maane..
par kahte he naa ki..kalam ki bhi apni takat hoti he aour ek din shabd rachte he snsaar...aapke shabd bhi rache snsaar..jnha ho bhavnao ka aadar aour ek esa jihad jo jindgi ko khushnuma kar de..na keval vishesh kuom ko balki pure snsar ko..

ऊर्दू दुनिया ने कहा…

बजा फरमाते है आप.
अब लोग जेहाद का मतलब अपने मुताबिक निकाल रहे है.आज जो लोग जेहाद की बातें कर रहे है, मुझे नहीं लगता वो जेहाद का मतलब भी जानते है.
आपने बहुत अच्छा लिखा है.
बधाई

rohit ने कहा…

Sahroj Saheb...
aapke kai artical ek saath pade.....aap ki baat sahi hai. per kitne log jante hai. kitne log mannte hai.....ek baaat se sahmat nahi hu....apne kaha azad ke baad koi neta nahi mila muslim ko....sir, jahwar lal nehru ho yaa indira gandhi....yaa aaj kalam...unko koi bhi hindusthani hi manta hai..na ki hindu yaa muslim....kripya aisha na kahe....log neta jise mante hai use hindu yaa muslim nahi maante...manmohan singh ko log kahte hai ki pahla sardar pm bana....magar unki immandari thi jo unhe pm bana le gai na ki sardar hona..sardar bahut they per itna immandar koi nahi...kalam sahbe ke saath bura hua..muslim vote ki khatir mulyam singh yadav ne unka naam aage kiay..kash sache hindustani ke naam per unka naam aage karte...kher kalam sahab to aam logo ke president ban gaye..yahi hai sachi hindutani apna kaam karo ....baki dunia gai bhaad me....

alok ने कहा…

jihad asatya ke virudh satya ka sath, jaisa ki aapne likha hai
to ye satya hai kya
main murtipujak hun kya ram krishna ko manta hun.
kya aap mere satya ko satya swikar karte hai.
please clear

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

asa,aap ne asli jehad chheda hai ,jehad dahshatgardi ka naam nahin hai,mubarak ho.

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